Rajeev Kumar

1. भूमि :-

बाजरा फसल सभी प्रकार की भूमियों में उगाई जा सकती है परन्तु इसे पानी रूकने वाली भूमि में नहीं उगाई जाती है। अतः पानी की निकासी आवश्यक है। यह रेतीली दोमट तथा काली मिट्टी तथा Aluvial भूमि में सफलता से उगाया जा सकता है।

2. भूमि की तैयारी :-

बाजरा उत्पादन के लिये खेत की तैयारी करते समय एक जुताई भूमि पलटने वाले हल से 15 सें.मी. गहरी करें इसके बाद 2 जुताई देशी हल या डिस्क हैरो या टिलर से कर पटेला लगा दें।

3. बीज की मात्रा :-

बाजरा का संकर बीज 1000 ग्राम से 1500 ग्राम प्रति एकड़ प्रमाणित या सुथरा टी.एल. बीज प्रयोग में लाएं।

4. बीजोपचार :-

बीज की बुवाई करने से पूर्व 2 ग्राम प्रति किलो कार्बनडाजिम से उपचारित कर बोना जाहि तथा उसके बाद एजोटीका 54 40 ग्राम प्रति 2 किलो बीज उपचारित करना चाहिए। एजोटीका भूमि में स्वतन्त्र रूप से नाइट्रोजन स्थापित करने से भरपूर फसल होने की सम्भावना बन जाती है।

5. बिजाई का तरीका :-

बाजरा की बिजाई बखेर कर न करें। बाजरा की फसल में प्रभावशाली पौधों की संख्या 80,000 यानि प्रति वर्ग मीटर 20 होनी चाहिए, इसलिये 45 सें.मी. लाइनों के बीच तथा पौधों के बीच 10 सें.मी. अन्तर रखा जाये। बीज 2.5 सें.मी. की गहराई पर डाला जाये। बिजाई पौरा, केरा, सीड ड्रिल से की जाए।

6. किस्में :-

RK – 92 , 

7. बिजाई का समय :-

बाजरा ग्रीष्म कालीन फसल है और जून-जुलाई में बिजाई उत्तम रहती है।

8. खाद एवं उर्वरक :-

खाद एवं उर्वरक की मात्रा निर्धारण के पहले Soil Health Card Check करना चाहिए यदि Soil Health Card नहीं बनवाया हुआ तो खेत तैयारी के साथ 100-150 क्विंटल गोबर की खाद या हरी खाद का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा बम्पर पैदावार लेने के लिये सिंचित क्षेत्रों में संकर बाजरा के लिये 50 Kg N यानि 110 किलो यूरिया, 20 किलो P. O, यानि 150 Kg सिंगिल सुपर फास्फेट 12 किलो, पोटाश यानि 20 Kg MOP तथा 10 किलो जिंक का उपयोग करें। असिंचित क्षेत्रों में 20 Kg N 45 Kg Urea, 10 Kg P, 0, 65 Kg सिंगिल सुपरफास्फेट । नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा, सिंगिल सुपरफास्फेट, म्युरिट ऑफ पोटाश तथा जिंक की पूरी मात्रा बिजाई के समय दें तथा यूरिया की मात्रा एक बार विरलोकरण के समय यानि बिजाई के 3-4 सप्ताह बाद तथा दूसरी किस्त सिट्टे / वालियां बनने के समय दें।

9. खरपतवार नियन्त्रण :-

बिजाई 5 सप्ताह बाद गुडाई करनी चाहिए। गहरी गुडाई की अवहेलना करनी चाहिए। रासायनिक नियन्त्रण में बाजरा बोने के तुरन्त बाद परन्तु उगने से पहले इटसिट, चुप्पती आदि घास को नष्ट करने के लिये 400 ग्राम एट्राजिन 50% W.P. 250 लीटर पानी में छिड़काव करना उत्तम रहेगा।

10. सिंचाई :-

बाजरा वर्षा ऋतु की फसल है अतः परिस्थितियों के अनुसार पानी देना चाहिए। यदि वर्षा नहीं हो रही तो 2 सिंचाई पर्याप्त हैं। ध्यान रहे खारे पानी से फसल उत्पादन आशानुकूल नहीं होगा। ध्यान रहे पानी न इकट्ठा हो और अधिक पानी की निकासी करनी आवश्यक है।

11. कीट नियन्त्रण :-

(A) बाल वाली काली सुन्डी 250 एम.एल. मोनोक्रोटोफास, या 250 एम.एल. ड्राईक्लोवास (नुवान) 250 लीटर पानी से छिड़काव करें।

(B) सफेद लट 250 मि.ली. मोनोक्रोटोफास 250 लीटर पानी में छिडकाव करें।

12. व्याधियाँ और उपचार :-

(i) कगियारी (Grain Smut) यह रोग Tolyposporium Penicillariae फफूंदी द्वारा फैलता है पूरी वाल नहीं कुछ दाने प्रभावित होते हैं। वाल में हरे दाने से दिखने लगते हैं। यह दाने की बाहरी झिल्ली है और यह फटते ही काला पाउडर दिखाई देता है। बीज बिजाई से पूर्व 2.5 ग्राम प्रति किलो बीज को एग्रोसन (PMA) या 3 ग्राम प्रति किलो बीज को थाईरम से उपचारित करके बोना चाहिए। प्रभावित वालियों को तोड़कर भूमि में दबा दें।

(ii) डाउनी मिलडयू, मृदुल रोमिल हरिता, ग्रीन इयर डिजीज / बाबा रोग:-यह बीमारी Selerospora graminicola फफूंद से फैलती है। इस रोग का प्रभाव पहले पत्तियों पर प्रकट होता है पत्तियाँ पीली या सफेद तथा Downy हो जाती हैं पत्ती के किनारे से Base तक एल लकीर बन जाती है, पौधा छोटा रह जाता है, बढवार रूक जाती है, पत्ता पीला पड़ जाता है, यह अवस्था Downy Mildew कहलाती है परन्तु यदि बीमारी का नियन्त्रण नहीं हुआ तो सम्पूर्ण या कुछ भाग में हरी वाल के रूप में परिवर्तित हो जाती है, जो सीधे उत्पादन को प्रभावित करती है। फसल पर शुरू में लक्षण प्रकट होते ही 2% डायथीन Z-78 का 2 से 3 सप्ताह की फसल में वूठ स्टेज तक स्प्रे करना चाहिए।

(iii) अरगट :- यह बीमारी Elevicep Fusifarmis फफूंद से होता है। इसमें दाने (Kernel) प्रभावित होते हैं। फूल आते समय गुलाबी चिपचिपा पदार्थ दानों से निकल कर जमीन पर भी गिरने लगता है यह जहरीला पदार्थ होता है और इन दानों को खाने से जन और पशु हानि हो सकती है। बिमारी के लक्षण दिखते ही फसल पर कुमान 1. 27% (सिरम) 500 एम.एल. 100 लीटर पानी में छिड़काव करना चाहिए। प्रभावित सिट्टियों को जला या दबा देना चाहिए।

टिप्पणी :-

बाजरा का उत्तम उत्पादन लेने के लिये कम्पनी के खुद के अनुसन्धान फार्म के, कृषि विश्वविद्यालयों तथा प्रगतिशील किसानों के अनुभव पर आधारित सिफारिशें हैं। विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में विभिन्न कारक उपज को प्रभावित करते हैं अतः किसान यदि इन सिफारिशों से सन्तुष्ट न हों तो अन्य श्रोतों से शष्य क्रियाओं को अपना सकता है। विभिन्न मौगौलिक क्षेत्रों के लिये स्थानीय कृषि विदों, विशेषज्ञों, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केन्द्रों, कृषि विज्ञान केन्द्रों से सलाह कर Package of Practices अपनाएँ।